बालोद। बालोद जिले के सिकोसा से कोडेवा को जोड़ने वाले मार्ग का निर्माण कार्य वर्तमान में आम जनता के लिए सुविधा के बजाय मुसीबत का सबब बन गया है। निर्माण कार्य की धीमी गति और ठेकेदार की घोर लापरवाही के चलते इस मार्ग पर चलने वाले राहगीर न केवल परेशान हैं, बल्कि गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार होने की कगार पर हैं।

आंखों में चुभती गिट्टी, धूल से बेहाल राहगीर
ग्रामीणों और राहगीरों ने शिकायत की है कि सड़क पर बिछाई गई गिट्टी के बारीक कण उड़कर वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया वाहन सवारों की आंखों में जा रहे हैं। निर्माण स्थल पर धूल के गुबार को रोकने के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिससे दृश्यता (visibility) कम हो गई है और लोगों को आंखों में संक्रमण व चोट का खतरा बना हुआ है।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
सड़क निर्माण की कछुआ चाल के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौके पर मौजूद स्थिति को देखकर स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। बिना उचित रोलिंग और बाइंडिंग के बिछाई गई गिट्टी उखड़ रही है, जो गुणवत्ताहीन कार्य का स्पष्ट प्रमाण है।
बढ़ती दुर्घटनाओं की आशंका
सड़क के किनारे किसी भी प्रकार के सुरक्षा संकेतक या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। सड़क के किनारे बेतरतीब ढंग से छोड़ी गई निर्माण सामग्री और अधूरी सड़क के तीखे मोड़ रात के समय जानलेवा साबित हो सकते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही कार्य में तेजी और गुणवत्ता में सुधार नहीं लाया गया, तो यहाँ कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि:
निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तत्काल जांच की जाए।
धूल रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित हो।
कार्य की समय-सीमा तय कर उसे शीघ्र पूर्ण कराया जाए ताकि राहगीरों को राहत मिल सके।
जनता ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य में सुधार नहीं हुआ, तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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