बालोद (छत्तीसगढ़) बालोद जिले के ग्राम सनौद में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने न केवल पूर्व जनप्रतिनिधियों बल्कि जिला माइनिंग विभाग के आला अधिकारियों पर भी इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है।

मुख्य विवरण: रात के अंधेरे में रेत की चोरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सनौद के तटीय क्षेत्रों से रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे सिंडिकेट का संचालन चंदनबिरी के पूर्व सरपंच अना देवांगन और उनके सहयोगी पुना देवांगन द्वारा किया जा रहा है।
संसाधन: बताया जा रहा है कि हर रात करीब 5 ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है।
कार्यप्रणाली: कार्रवाई से बचने के लिए उत्खनन का कार्य मुख्य रूप से देर रात और तड़के किया जाता है, जिससे राजस्व को लाखों की चपत लग रही है।
प्रशासनिक संरक्षण के घेरे में माइनिंग विभाग
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासनिक चुप्पी है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बालोद के माइनिंग अधिकारी प्रवीण चंद्राकर और शशांक सोनी के संरक्षण के बिना इतना बड़ा अवैध कारोबार मुमकिन नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद माइनिंग विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करना विभाग की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
"अवैध रेत खनन का यह खेल लंबे समय से बेखौफ चल रहा है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौन है, क्योंकि उन्हें ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। शासन के राजस्व की चोरी हो रही है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँच रहा है।" — स्थानीय ग्रामीण
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने अब शासन और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि:
अना देवांगन और पुना देवांगन के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो।
माइनिंग विभाग के अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
अवैध परिवहन में लगे ट्रैक्टरों को तत्काल जब्त किया जाए।
चेतावनी: क्षेत्र के निवासियों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस अवैध उत्खनन पर लगाम नहीं लगाई, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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