बालोद, 03 जून 2026 जिले में खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के नाम पर खनिज विभाग द्वारा एक बार फिर 'खानापूर्ति' और 'दिखावे की कार्रवाई' का खेल खेला गया है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के सख्त निर्देशों का ढिंढोरा पीटकर विभाग अपनी पीठ तो थपथपा रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
कागजी कार्रवाई और 'चैन माउंटेन' का खेल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 02 जून 2026 को खनिज विभाग की टीम ने डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत बेलोदा के आश्रित ग्राम अरजगुंडरा में एक तथाकथित 'औचक निरीक्षण' किया। कार्रवाई के नाम पर टीम ने रेत के अवैध उत्खनन में लगी एक नारंगी रंग की जेसीबी चैनमाउंटेन मशीन (इंजन नं. 95404111) को जप्त तो किया, लेकिन इसके पीछे की कहानी कुछ और ही बयां करती है।
ग्रामीणों में चर्चा है कि यह कार्रवाई सिर्फ जिला प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने और मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए की गई है।
सवाल जो विभाग की नीयत पर खड़े करते हैं निशान:
मालिकों पर मेहरबानी क्यों? विभाग ने मशीन तो जप्त कर ली, लेकिन इस अवैध काले कारोबार के पीछे बैठे असली रेत माफिया (मालिकों) का नाम उजागर करने से बचता रहा।
कोटवार के भरोसे जब्ती: इतनी बड़ी और कीमती चैनमाउंटेन मशीन को जप्त कर विभाग ने उसे सुरक्षित थाने या सरकारी परिसर में खड़ा करने के बजाय, कोटवार और उपसरपंच के सुपुर्द कर दिया। यह सीधे तौर पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है।
महीनों से चल रहा था खेल: ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में महीनों से धड़ल्ले से अवैध उत्खनन हो रहा है। जब पानी सिर से ऊपर चला गया और शिकायतें बढ़ने लगीं, तब जाकर विभाग ने अपनी साख बचाने के लिए यह 'दिखावे की रेड' मारी।
अधिकारियों का वही पुराना रटा-रटाया राग
हर बार की तरह इस बार भी जिला खनिज अधिकारी ने खान व खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत कार्रवाई की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है। अधिकारी का दावा है कि भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन क्षेत्र की जनता यह भली-भांति जानती है कि यह कार्रवाई सिर्फ कुछ दिनों की शांति और फिर से 'अवैध वसूली' का रास्ता साफ करने का जरिया मात्र है।
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