बालोद/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के खनिज विभाग में कार्यरत अधिकारी प्रवीण चंद्राकर की संदिग्ध कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर एक औपचारिक शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई है। इस पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़), संभागायुक्त (दुर्ग) और कलेक्टर (बालोद) को भी प्रेषित की गई हैं।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम:
पुराना रिकॉर्ड: शिकायत के अनुसार, संबंधित अधिकारी जब राजनांदगांव में पदस्थ थे, तब मोहड़ वार्ड (शिवनाथ नदी) में हुए अवैध रेत उत्खनन और गोलीकांड मामले में संलिप्तता एवं लापरवाही के कारण उन्हें छत्तीसगढ़ शासन द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था।
वर्तमान स्थिति: गंभीर आरोपों और पूर्व निलंबन के बावजूद, उक्त अधिकारी की वर्तमान नियुक्ति जिला बालोद में की गई है, जहाँ उन पर संरक्षण देने के नए आरोप लगे हैं।
अवैध ईंट भट्ठा और खनन: शिकायतकर्ता का आरोप है कि अधिकारी के संरक्षण में बालोद जिले के गुण्डरदेही ब्लॉक में 200 से अधिक अवैध ईंट भट्ठों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। इसके अतिरिक्त, बिना रॉयल्टी के मुरुम और रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है।
राजस्व और पर्यावरण को क्षति:
शिकायत पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन गतिविधियों से न केवल सरकारी राजस्व को भारी 'चूना' लगाया जा रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी अपूर्णीय क्षति पहुँच रही है। यह केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का उल्लंघन है।
प्रमुख मांगें:
पत्र के माध्यम से प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
अधिकारी प्रवीण चंद्राकर के विरुद्ध पूर्व के मामलों और वर्तमान में अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए।
पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले अवैध संचालकों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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