बालोद:
छत्तीसगढ़ के खनिज विभाग में कार्यरत अधिकारी प्रवीण चंद्राकर की संदिग्ध कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के मामलों ने अब तूल पकड़ लिया है। राजनांदगांव में हुए चर्चित गोलीकांड और अवैध रेत उत्खनन मामले में पूर्व में निलंबित रह चुके इस अधिकारी के विरुद्ध अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
गंभीर आरोपों के घेरे में अधिकारी
शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में यह उल्लेख किया है कि प्रवीण चंद्राकर जब राजनांदगांव में पदस्थ थे, तब मोहड़ वार्ड (शिवनाथ नदी) में हुए अवैध रेत खनन और हिंसक गोलीकांड के बाद शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था। आरोप है कि इतने गंभीर दागी रिकॉर्ड के बावजूद, उन्हें वर्तमान में बालोद जिले की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पर्यावरण और राजस्व को नुकसान
विज्ञप्ति के अनुसार, बालोद जिले में पदस्थापना के दौरान उक्त अधिकारी पर क्षेत्र में गुण्डरदेही क्षेत्र में सैकड़ों ईट भट्टा अवैध ईंट भट्टों को प्रत्यक्ष संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायत में कहा गया है कि:
नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध ईंट भट्टों का संचालन किया जा रहा है।
इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
सरकारी खजाने (राजस्व) को भारी वित्तीय हानि हो रही है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने केंद्र सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री से मांग की है कि ऐसे दागी अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, अवैध संचालकों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
इस शिकायत के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। साथ ही प्रवीण चंद्राकर फोन उठाना छोड़ पत्रकारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मोबाइल नंबर भी ब्लैक लिस्ट में टलगा देता है और पूछने पर माननीय रजत बंसल सचिव भी मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाएगा जैसी शब्दों का इस्तेमाल भी राजनांदगांव में पदस्थ के दौरान कर चुका है।
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