गुंडरदेही:आपसी प्रेम, भाईचारे और गौरवशाली परंपरा के प्रतीक रंगों के महापर्व होली के उपलक्ष्य में, गुंडरदेही स्थित साहू सदन में एक भव्य "होली मिलन एवं सम्मान समारोह" का गरिमामय आयोजन किया गया। इस उत्सव ने न केवल रंगों की खुशियाँ बिखेरीं, बल्कि भक्ति और सामाजिक सरोकार का एक अनूठा उदाहरण भी पेश किया।

फूलों की होली बनी मुख्य आकर्षण
इस वर्ष के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता "फूलों की होली" रही। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए आयोजकों ने रसायनों और गुलाल के बजाय टनों सुगंधित फूलों की पंखुड़ियों का उपयोग किया। जब भगवान श्री कृष्ण के भजनों पर उपस्थित जनसमूह झूम उठा और फूलों की वर्षा हुई, तो पूरा परिसर गोकुल धाम सा प्रतीत होने लगा।
प्रतिभाओं का सम्मान और विशेष भेंट
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली स्थानीय प्रतिभाओं, विशिष्ट जनों और पत्रकार बंधुओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर सम्मान के प्रतीक स्वरूप श्री कृष्ण और राधा जी की मनमोहक प्रतिमा (मोमेंटो) भेंट की गई, जो प्रेम और समर्पण का संदेश दे रही थी।
सांस्कृतिक एकता का संगम
कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध जनों ने शिरकत की। सभी ने एक-दूसरे को होली की बधाई देते हुए समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया।
आयोजक का संदेश
आयोजन समिति की ओर से सपना माधवानी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"इस आयोजन का मूल मंत्र समाज को एकता के सूत्र में पिरोना है। हमने 'होली के रंगों के साथ, अपनों का संग' थीम पर आधारित इस उत्सव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि खुशियाँ सादगी और प्राकृतिक तरीके से भी मनाई जा सकती हैं। श्री कृष्ण-राधा जी का मोमेंटो भेंट करना हमारी संस्कृति और प्रेम के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।"
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
पर्यावरण हितैषी: रसायनों का त्याग कर पूर्णतः फूलों से खेली गई होली।
भक्तिमय वातावरण: श्री कृष्ण के भजनों पर सामूहिक नृत्य और आनंद।
विशिष्ट सम्मान: समाज के गौरवों को राधा-कृष्ण की प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।
सामूहिक भोज: अंत में सभी उपस्थित जनों ने स्नेह भोज का आनंद लिया।
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