छत्तीसगढ

क्या संविधान से ऊपर हैं दुर्ग निगम आयुक्त?* निर्वाचित भाजपा महिला पार्षद को नोटिस पर उठा बड़ा सवाल, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजेंगी प्रतिवेदन।

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दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के आयुक्त सुमित अग्रवाल द्वारा वार्ड क्रमांक 58 की निर्वाचित महिला पार्षद श्रीमती रेशमा सोनकर को जारी नोटिस ने अब संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक बहस को जन्म दे दिया है। पार्षद ने नोटिस को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसका कड़ा कानूनी जवाब तैयार किया है और कहा है कि यह केवल एक नोटिस नहीं, बल्कि जनता द्वारा निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की गरिमा, लोकतांत्रिक अधिकारों तथा भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रश्नचिह्न है।

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पार्षद का कहना है कि वे जनता द्वारा चुनी गई प्रतिनिधि हैं और वार्डवासियों की समस्याओं को उठाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है। यदि जनहित के मुद्दे उठाने पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को नोटिस देकर दबाने का प्रयास किया जाएगा, तो यह स्थानीय स्वशासन की भावना के विपरीत होगा।

 

पार्षद ने नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों का स्पष्ट शब्दों में खंडन करते हुए कहा है कि उन्होंने किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार अथवा मजदूर के साथ न तो मारपीट की, न धमकी दी और न ही किसी शासकीय कार्य में बलपूर्वक बाधा उत्पन्न की। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि आरोप लगाए गए हैं तो उनके समर्थन में वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, स्वतंत्र गवाह, पुलिस रिकॉर्ड या अन्य विधिसम्मत साक्ष्य सार्वजनिक किए जाएँ।

 

पार्षद ने यह भी आपत्ति जताई है कि उन्हें नोटिस में केवल व्यक्तिगत नाम से संबोधित किया गया, जबकि वे जनता द्वारा निर्वाचित महिला पार्षद हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार किसी प्रशासनिक अधिकारी के पद की गरिमा का सम्मान अपेक्षित है, उसी प्रकार निर्वाचित जनप्रतिनिधि के पद का सम्मान भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है।

 

अपने जवाब में पार्षद ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 एवं 21 तथा 74वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा है कि भारतीय संविधान सर्वोच्च है और कोई भी प्रशासनिक अधिकारी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाना अपराध नहीं, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि का संवैधानिक दायित्व है।

 

इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए पार्षद ने निर्णय लिया है कि वे अपना विस्तृत प्रतिवेदन केवल आयुक्त तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि इसकी प्रतिलिपि माननीय राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राज्यपाल, माननीय मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री, माननीय शिक्षा मंत्री एवं विधायक दुर्ग-64, महापौर नगर पालिक निगम दुर्ग, मुख्य सचिव, सचिव नगरीय प्रशासन, संचालक नगरीय प्रशासन, संभागायुक्त तथा कलेक्टर दुर्ग को भी भेजेंगी। प्रतिवेदन में सभी संबंधित संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्राधिकारियों से इस प्रकरण का संज्ञान लेकर आवश्यक वैधानिक एवं प्रशासनिक कदम उठाने का अनुरोध किया जाएगा।

 

पार्षद का कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा का है। यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों को जनता की समस्याएँ उठाने पर इस प्रकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

 

पार्षद ने यह भी दावा किया है कि संबंधित स्थल पर ठोस अपशिष्ट (कचरा) जलाया जा रहा है, जो उनके अनुसार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के विपरीत है। उनका कहना है कि इस संबंध में उनके पास पर्याप्त फोटो एवं वीडियो सहित अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। पार्षद ने कहा कि इन साक्ष्यों को उचित समय पर माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है, ताकि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो सके और यदि किसी प्रकार का पर्यावरणीय उल्लंघन हुआ है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित हो।

 

अब यह मामला केवल निगम स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में भी इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या स्थानीय निकायों में प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच संवैधानिक मर्यादा एवं संस्थागत सम्मान का संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।

 

पार्षद ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, स्थानीय स्वशासन की गरिमा, महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और कानून के शासन की रक्षा के लिए लड़ी जा रही है। उनका कहना है कि यदि प्रशासनिक निर्णय संविधान, पर्यावरणीय कानूनों और लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर खरे नहीं उतरते, तो उनके विरुद्ध उपलब्ध वैधानिक मंचों पर न्याय की मांग की जाएगी।

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