जगदलपुर, बस्तर (छत्तीसगढ़): बस्तर जिले के निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारों के खिलाफ सरपंच संघ द्वारा लगाए गए अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग के आरोपों को स्थानीय पत्रकार संगठनों ने पूरी तरह से मनगढ़ंत, झूठा और द्वेषपूर्ण बताया है। पत्रकारों का कहना है कि पंचायतों में चल रहे भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के दुरुपयोग को उजागर करने से बौखलाए कुछ सरपंच अब मीडिया की आवाज दबाने के लिए झूठी शिकायतों का सहारा ले रहे हैं।

भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश
पत्रकार साथियों का कहना है कि बस्तर जिले की कई पंचायतों में विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। जब स्थानीय सजग पत्रकारों ने इन मामलों से जुड़े दस्तावेज (RTI और ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए) एकत्र कर सरपंचों से उनका पक्ष जानना चाहा, तो अपनी कमियां छुपाने के लिए सरपंचों ने एकजुट होकर पत्रकारों को ही बदनाम करने की साजिश रच डाली।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें सच का हिस्सा
शिकायत में जिस 'एडिटेड तस्वीरों' और 'झूठी खबरों' का हवाला दिया गया है, उस पर पत्रकारों का साफ कहना है कि वे तस्वीरें पंचायतों में अधूरे पड़े निर्माण कार्यों, घटिया सामग्री के उपयोग और धरातल की सच्चाई को बयां करती हैं। सच सामने आने के डर से इसे 'मानसिक प्रताड़ना' का नाम दिया जा रहा है, ताकि कोई भी पत्रकार ग्रामीण इलाकों में जाकर जांच करने की हिम्मत न कर सके।
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि:
सरपंच संघ द्वारा लगाए गए इन आरोपों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की जाए।
पत्रकारों को बदनाम करने और उन्हें डराने के उद्देश्य से की गई इस झूठी शिकायत को तुरंत खारिज किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) को सुरक्षा प्रदान की जाए।
पत्रकारों का स्पष्ट रुख है कि वे इस प्रकार के किसी भी दबाव या झूठे आरोपों से डरने वाले नहीं हैं और बस्तर की जनता के हक के लिए पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार को लगातार उजागर करते रहेंगे।
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