होम / छत्तीसगढ / नगर पालिक निगम, दुर्ग: राजस्व वसूली में भारी फिसड्डी, क्या कर्मचारियों को डराकर लक्ष्य पूरा करेगी सरकार? 60 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 20 करोड़ की वसूली; कमिश्नर की रणनीति पर उठे गंभीर सवाल।
छत्तीसगढ
दुर्ग। वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति में अब चंद दिन ही शेष हैं, लेकिन दुर्ग नगर निगम की माली हालत खस्ता नजर आ रही है। निगम के आंतरिक 'गोस्वारा' (राजस्व रिपोर्ट) से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। 15 मार्च 2026 तक, निगम प्रशासन को लगभग 60 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली करनी थी, जिसके मुकाबले अब तक मात्र 20.06 करोड़ रुपये ही खजाने में आए हैं। यानी साल भर की भागदौड़ के बाद भी वसूली का आंकड़ा महज 33 प्रतिशत पर सिमट गया है।

साल भर सुस्ती, अब बर्खास्तगी की धमकी
अंतिम समय में अपनी विफलता छिपाने के लिए निगम प्रशासन अब कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई का सहारा ले रहा है। सूत्रों के अनुसार, निगम के आधिकारिक 'राजस्व कर्मवीर' ग्रुप में अधिकारियों ने तुगलकी फरमान जारी किया है। संदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि:
31 मार्च तक जिस भी ARI (सहायक राजस्व निरीक्षक) या RSI की वसूली 70% से कम रही, उन्हें नौकरी से बर्खास्त या डिमोशन कर दिया जाएगा।
कर्मचारियों को अब प्रतिदिन 75 लाख रुपये वसूलने का असंभव सा लक्ष्य दिया गया है।
प्रशासनिक विफलता या कर्मचारियों की लापरवाही?
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और जानकारों का कहना है कि राजस्व वसूली किसी भी निगम की रीढ़ होती है। यदि कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों ने साल की शुरुआत से ही प्रभावी मॉनिटरिंग की होती, तो आज कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की नौबत नहीं आती। पूरे साल रणनीति के अभाव में सुस्त पड़े रहने वाले प्रशासन का अचानक जागना और निचले स्तर के कर्मचारियों पर दबाव बनाना, प्रशासनिक अदूरदर्शिता को दर्शाता है।
अहम सवाल जो जवाब मांगते हैं:
जब वसूली का ग्राफ साल भर नीचे रहा, तब समीक्षा बैठकें क्यों बेअसर रहीं?
क्या 15 दिनों में बाकी के 40 करोड़ रुपये वसूलना व्यावहारिक रूप से संभव है?
क्या अधिकारियों की अपनी विफलता का ठीकरा छोटे कर्मचारियों पर फोड़ना उचित है?
वसूली न होने से शहर के विकास कार्यों पर जो ब्रेक लगा है, उसका जिम्मेदार कौन है?
नगर निगम दुर्ग की इस स्थिति ने अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। देखना यह होगा कि क्या निगम प्रशासन अपनी रणनीतियों में सुधार करेगा या केवल कर्मचारियों पर गाज गिराकर "लक्ष्य पूर्ति" का कागजी खानापूर्ति की जाएगी।
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