बालोद। जिले में अवैध मुरूम खनन और परिवहन का खेल धड़ल्ले से जारी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। क्षेत्र में लगभग 200 ईंट भट्टा संचालकों द्वारा नियम-कायदों को ताक पर रखकर अवैध रूप से मुरूम का दोहन किया जा रहा है, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।

अधिकारी नदारद, दफ्तर में चलता रहा 'पंखा'
इसी गंभीर विषय पर जानकारी लेने और शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए जब मीडिया प्रतिनिधि और जागरूक नागरिक खनिज विभाग के कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। जिला माइनिंग अधिकारी प्रवीण चंद्राकर ड्यूटी समय के दौरान अपने कार्यालय से नदारद पाए गए। हद तो तब हो गई जब साहब की कुर्सी खाली थी और उनके केबिन में पंखा चलता रहा, जो सरकारी संसाधनों की बर्बादी और काम के प्रति उनकी घोर लापरवाही को दर्शाता है।
विवादास्पद रहा है कार्यकाल
गौरतलब है कि प्रवीण चंद्राकर वही अधिकारी हैं, जिन्हें पूर्व में राजनांदगांव जिले में पदस्थापना के दौरान लापरवाही और कार्य में अनियमितता के चलते निलंबित (Suspend) किया जा चुका है। राजनांदगांव के बाद अब बालोद में भी उनके कामकाज की शैली पर गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।
अवैध गतिविधियों को मिल रहा मौन संरक्षण?
200 से अधिक ईंट भट्टों में मुरूम का अवैध परिवहन बिना किसी रोक-टोक के जारी रहना इस बात की ओर इशारा करता है कि क्या माइनिंग विभाग के संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है? जनचर्चा है कि अधिकारी की अनुपस्थिति और ढुलमुल रवैये के कारण ही माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
इस मामले में अब जिले के वरिष्ठ अधिकारियों और शासन से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, ताकि अवैध खनन पर अंकुश लगाया जा सके और कर्तव्य के प्रति लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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