सपना माधवानी गुंडरदेही (छत्तीसगढ़) की रिपोर्ट:
तहसील कार्यालय के समीप कृषि भूमि को नियमों के विरुद्ध टुकड़ों में काटकर बेचने और अवैध प्लॉटिंग करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ग्राम रेवटड़ा क्षेत्र में भू-माफिया शासन के नियमों की अवहेलना करते हुए बिना किसी वैधानिक अनुमति के कृषि भूमि पर धड़ल्ले से प्लॉटिंग का कार्य कर रहे हैं।
मुख्य विवरण:
नियमों की अनदेखी: शासन के गाइडलाइंस के अनुसार, यदि कोई भूमि स्वामी अपनी जमीन को तीन से अधिक टुकड़ों में बेचता है, तो उसे 'कॉलोनाइजर' की श्रेणी में माना जाता है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से लाइसेंस और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) से अनुमति अनिवार्य है, जिसका इस मामले में उल्लंघन पाया गया है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव: अवैध प्लॉटिंग के माध्यम से आम जनता को गुमराह किया जा रहा है। इन भूखंडों पर न तो ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था है और ना ही सड़क, बिजली या पानी जैसी अनिवार्य सुविधाओं के लिए कोई प्रावधान किया गया है।
राजस्व को नुकसान: बिना अनुमति के कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग (डायवर्सन) किए बिना बिक्री करने से सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुँच रही है।
प्रशासनिक रुख:
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। आम जनता को सूचित किया जाता है कि:
किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले उसके वैधानिक दस्तावेज, डायवर्सन पेपर और कॉलोनाइजर लाइसेंस की गहन जांच करें।
अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से बचें, क्योंकि भविष्य में ऐसी संपत्तियों पर बुलडोजर चलने या कानूनी कार्रवाई की संभावना रहती है।
संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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