होम / भिलाई / कौड़िया और मेडेसरा में 'सुशासन' की आड़ में अवैध मुरूम खनन का खेल; शासन को लग रहा लाखों का चूना ग्रामीणों का आरोप: ग्राम विकास नहीं, सिर्फ सरपंच का हो रहा विकास; 15 से अधिक गाड़ियां अवैध काम में लिप्त।
भिलाई
दुर्ग: दुर्ग जिले के कौड़िया और मेडेसरा क्षेत्र में तालाबों से अवैध रूप से लाल मुरूम निकालकर अवैध लाभ कमाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस संबंध मे ग्रामीण द्वारा दुर्ग कलेक्टर और उप संचालक खनिज विभाग को लिखित शिकायत सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में गंभीर आरोप: कलेक्टर को सौंपे गए पत्र के अनुसार, कौड़िया सगनी घाट रोड और मेडेसरा पेट्रोल पंप के पास धड़ल्ले से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस अवैध खनन को तुरंत रोका जाए और अब तक निकाले गए मुरूम का मूल्यांकन (रिकवरी) कर उसे शासन के खाते में सरकारी राजस्व के रूप में वसूला जाए।
जिम्मेदारों के विरोधाभासी बयान और ग्रामीणों का आक्रोश: इस पूरे मामले में जब संबंधित माइनिंग अधिकारी से बात की गई, तो उनका कहना था कि “अधिकारी और कर्मचारी फिलहाल सुशासन के कार्यों में व्यस्त हैं।” अधिकारी के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से साफ है कि विभाग की व्यस्तता का फायदा उठाकर खनन माफिया सरकार को खनिज राजस्व का बड़ा चूना लगा रहे हैं।
दूसरी ओर, जब इस संबंध में कौड़िया ग्राम पंचायत के सरपंच से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि “ग्राम विकास के कार्यों के लिए जेसीबी (JCB) मशीन लगाई गई है।” हालांकि, जमीनी हकीकत सरपंच के दावों से बिल्कुल उलट है। स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि मौके पर 15 से अधिक गाड़ियां लगातार अवैध खनन और परिवहन में लगी हुई हैं। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा— "यहाँ न तो ग्राम का विकास हो रहा है और न ही सरकार का राजस्व बढ़ रहा है, यह विकास सिर्फ और सिर्फ सरपंच का निजी विकास है।"
त्वरित कार्रवाई की मांग: सुशासन की आड़ में चल रहे इस अवैध कारोबार को लेकर क्षेत्र के नागरिकों में भारी असंतोष है। मीडिया और स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध खनन नेटवर्क पर तत्काल छापामार कार्रवाई की जाए, संलिप्त वाहनों को जब्त किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
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