बलौदाबाजार। ग्राम धौराभाठा स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. में सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने एक और मज़दूर की जान ले ली है। आज घायल श्रमिक श्री रामु भूया की उपचार के दौरान हुई मृत्यु ने औद्योगिक सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। इस संयंत्र में अब तक 7 मज़दूर अपनी जान गंवा चुके हैं, जो यह साबित करता है कि यहाँ प्रबंधन के लिए मज़दूरों का जीवन महज़ एक आँकड़ा है।

मुआवजा न्याय नहीं, केवल राहत है
मृतक के परिजनों और स्थानीय नागरिकों के उग्र आंदोलन के बाद, प्रबंधन ने ₹20 लाख (दस-दस लाख के दो चेक) का मुआवजा प्रदान किया है और शव को उनके गृहग्राम (गया, बिहार) भेजने की व्यवस्था की है। लेकिन आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि "पैसा किसी की जान की कीमत नहीं हो सकता।"
प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ मुख्य मांगें:
संयंत्र में बढ़ती मौतों और प्रशासनिक चुप्पी के खिलाफ आंदोलनकारियों ने निम्नलिखित मांगें शासन के समक्ष रखी हैं:
न्यायिक जांच: इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच तत्काल प्रभाव से शुरू की जाए।
गैर-इरादतन हत्या का मामला: कंपनी प्रबंधन और जिम्मेदार सुरक्षा अधिकारियों पर धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज हो।
स्थायी सुरक्षा: मृतक के परिवार को केवल नकद राशि नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार और आजीवन सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
सुरक्षा ऑडिट: जिले के सभी उद्योगों का सुरक्षा ऑडिट हो और मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों को तुरंत सील किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
श्रमिक नेताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि दोषियों को प्रशासनिक संरक्षण दिया गया, तो यह लड़ाई अब सड़कों से शुरू होकर सदन तक जाएगी। जब तक कारखानों में सुरक्षा 'कागज़ों' से निकलकर 'ज़मीन' पर नहीं आती, तब तक मज़दूरों के हक की यह आवाज़ बुलंद रहेगी।
"यह लड़ाई सिर्फ धौराभाठा की नहीं है, बल्कि हर उस मज़दूर की है जो सुबह घर से पेट पालने निकलता है पर शाम को उसके जिंदा लौटने की कोई गारंटी नहीं होती। हमें कागजी आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए!"
भवदीय,
(इकराम सैफी प्रदेश अध्यक्ष हिंदुस्तान आवाम मोर्चा छ: ग़)
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